Wednesday, 18 September 2019, 7:21 AM

जीवन मंत्र

मूर्ति रुप में श्रीहरि

Updated on 12 July, 2019, 6:00
पुंडलिक भगवान विष्णु का अनन्य भक्त था और श्रीहरि के दर्शनों की ईच्छा रखता था। इसके लिए वह हर तरह के जतन पूजा-पाठ, जप-तप और यज्ञ- अनुष्ठान करता रहता था। पुंडलिक की भक्ति से प्रसन्न होकर एक बार भगवान विष्णु उसके घर पर उसको दर्शन देने के लिए पहुंचे। उस... आगे पढ़े

आपकी सोच पर निर्भर है कर्म 

Updated on 11 July, 2019, 0:00
दो मित्र अक्सर एक वेश्या के पास जाया करते थे। एक शाम जब वे वहां जा रहे थे, रास्ते में किसी संत का आध्यात्मिक प्रवचन चल रहा था। एक मित्र ने कहा कि वह प्रवचन सुनना पसंद करेगा। उसने उस रोज वेश्या के यहां नहीं जाने का फैसला किया। दूसरा... आगे पढ़े

गरीब होने का अहसास 

Updated on 10 July, 2019, 6:00
पुराने जमाने की बात है तीनों लोकों के धन देवता कुबेर ने एक दिन सोचा कि मेरे पास इतनी संपत्ति है क्यों न उसका प्रदर्शन किया जाए। यह विचार कर उन्होंने एक भव्य भोज का आयोजन किया। तीनों लोकों के समस्त देवताओं को उन्होंने आमंत्रित किया। भगवान शिव उनके इष्ट... आगे पढ़े

अशांति का कारण होती हैं कामनाएं 

Updated on 9 July, 2019, 6:00
वर्तमान समय में अधिकांश मनुष्य विचारों के नाकारात्मक प्रभाव के वशिभूत है। यही वजह है कि संपूर्ण विश्व कहीं न कहीं युद्ध के कगार पर खड़ा नजर आ रहा है। भारतीय ही नहीं दुनिया के  नेताओं और धार्मिक शक्तियों के विचारों में सामंजस्यता नजर नहीं आ रही है।  वर्तमान समाज... आगे पढ़े

मौत का जश्न 

Updated on 8 July, 2019, 6:00
एक राजा थे जो अपने मंत्री के ज्ञान व उनकी चेतना से कुपित थे। एक बार मंत्री के जन्मदिन समारोह के दौरान जब सब खुशिंयां मना रहे थे तभी सैनिक राजा का संदेश लेकर पहुंचे और बोले कि आज शाम को मंत्री को फांसी दी जाएगी। यह सुनकर समारोह में... आगे पढ़े

अन्न के कण और आनंद के क्षण

Updated on 7 July, 2019, 6:00
महाकवि कालिदास रास्ते में थे। प्यास लगी। वहां एक पनिहारिन पानी भर रही थी। कालिदास बोले : माते! पानी पिला दीजिए बड़ा पुण्य होगा। पनिहारिन बोली : बेटा, मैं तुम्हें जानती नहीं। अपना परिचय दो। मैं पानी पिला दूंगी।  कालिदास ने कहा : मैं मेहमान हूं, कृपया पानी पिला दें।... आगे पढ़े

 सफलता मिलेगी दिल लगाकर करें काम

Updated on 6 July, 2019, 6:00
यह वह दौर है जहां सफलता के गुण बताने के लिए बकायदा क्लासें लगाई जाती हैं। सफल बनने के गुर बताते गुरु अब बहुतायत में मिलने लगे हैं। ऐसे में एक काफी समय पहले की बात याद आती है। तब गुरू गोविंद साहब के कुछ शिष्य उनके पास आए और... आगे पढ़े

सादगी में है महानता 

Updated on 5 July, 2019, 6:00
महान से महान व्यक्ति से जब आप मिलते हैं तो उसकी कोई न कोई बात से जरुर प्रभावित होते हैं, ऐसे में उसकी महानता यदि सादगी में नजर आती है तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है। एक छोटी से कहानी सुनाता हूं। एक कंपनी के प्रौढ़ व्यवस्थापक ने... आगे पढ़े

चापलूसी सबसे बड़ी मूर्खता

Updated on 4 July, 2019, 6:00
कभी कभी किसी का संस्मरण भी इंसान को बेहतर राह दिखाने का काम कर जाता है। ऐसा ही एक संस्मरण अमेरिका के एक बड़े राजनेता ने लिखा, जिसमें उन्होंने बताया कि ‘लुहार की दुकान के सामने से एक दिन गुजर रहा था। उसका दूसरा साथी कहीं चला गया था। अकेला... आगे पढ़े

इष्ट के साथ विसर्जन मांगती श्रद्धा 

Updated on 2 July, 2019, 6:00
एक समय की बात है कि एक गुरुकुल में वर्षों से एक शिष्य अपने गुरु से शिक्षा ग्रहण कर रहा था। एक दिन वह यह देखकर अचंभित रह गया कि उसके गुरु तो पानी के ऊपर ऐसे चल रहे हैं मानों वो ठोस जमीन पर चल  रहे हों। यह देख... आगे पढ़े

मन को बनाएं अपना गुलाम  

Updated on 1 July, 2019, 6:00
जीवन में संन्यास का महत्व समझने और समझाने वाले मन को गुलाम बनाने का उपक्रम भी बताते हैं। ऐसे सन्यासियों के अनुसार मन का बदलाव, ध्यान और सन्यास संयुक्त घटनाएं हैं और मनुष्य के मन का नियम है कि निर्णय लेते ही मन बदलना शुरू हो जाता है। आपने भीतर... आगे पढ़े

सुनना सीखें ध्यान करना भी आ जाएगा 

Updated on 30 June, 2019, 6:00
व्यक्ति सुनता है तो विचार करता है, लेकिन जो सुनता ही नहीं है वह विचार आखिर कैसे कर सकता है। इसी संदर्भ में बताया जाता है कि तुम्हारे मन पर सतत् चारों तरफ से तरह-तरह के विचारों का आक्रमण होता है। स्वयं का बचाव करने के लिए हर मन ने... आगे पढ़े

श्रम का सम्मान करें जीवन में आएगी खुशहाली  

Updated on 29 June, 2019, 6:00
संत व साधु समेत विद्वान जब कहीं जाते हैं तो वहां की अच्छाइंयां भी अपने साथ ही ले आते हैं और फिर जो उनके सानिध्य में आता है वो उसका लाभ उन्हें पहुंचाते हैं। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है कि क्योंकि जब स्वामी सत्यदेव परिव्राजक ने अमेरिका यात्रा की... आगे पढ़े

भगवान मनुष्य के हृदय में 

Updated on 28 June, 2019, 7:00
ईश्वर ने तो चींटी से लेकर हाथी तक की रचना कर डाली, लेकिन तब सृष्टि में न तो कोई उत्पात मचा न झंझट ही खड़ा हुआ। न ईश्वर से किसी कुछ माँगा न कोई शिकायतें ही करता दिखा, किन्तु जब वह मनुष्य की रचना कर चुका तो परमात्मा उस दिन... आगे पढ़े

जीवन में सकारात्मक क्रांति

Updated on 27 June, 2019, 6:00
पृथ्वी पर अत्याचार का नाष करने ईश्वर ने समय-समय पर किसी ना किसी रूप में जन्म लिया और अत्याचार को खत्म किया। पौराणिक ग्रंथों में ऐसी कई कहानियों का उल्लेख है। भगवान ने स्वयं कहा है कि जब जब अत्याचार बढेगा। तो क्रांति होगी। यह क्रांति बुराई का अंत करने... आगे पढ़े

भले-बुरे में भाग्य का योगदान

Updated on 26 June, 2019, 6:00
एक ऐसा घोड़ा किसान के पास था जो राजा के अस्तबल में भी नहीं था। इस तरह किसान के घोड़े की ख्याति चारों ओर फैल गई। लोग मुँह माँगा मोल देने को तैयार दिख रहे थे, किन्तु किसान किसी कीमत पर घोड़ा बेचने को तैयार ही नहीं था। किसान को... आगे पढ़े

जीवनोपरांत अमरत्व

Updated on 25 June, 2019, 6:00
धर्म कहता है जीवन ऐसे जियो ताकि जीव को अमरत्व प्राप्त हो जाए। इसलिए कहते हैं कि जीवन में यदि कोई सिद्धांतवादी हो जाता है तो उससे मार्ग प्रशस्त करने को भी कहा जाता है। ऐसा सबसे बड़ा उदाहरण हमारे सम्मुख राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का है। जिनके जन्म दिन 2... आगे पढ़े

 मानव जीवन का महत्व   

Updated on 24 June, 2019, 6:00
यदि कभी मन में आत्महत्या का विचार आ भी जाए तो एक बार जरुर सोचें कि यह अनमोल शरीर क्या फिर कभी मिलने वाला है। इसे समझाने के लिए यहां एक कहानी प्रस्तुत है। यथा- एक समय की बात है, एक व्यक्ति नदी के किनारे आत्महत्या करने गया। पास ही... आगे पढ़े

असली आनंद की अनुभूति

Updated on 23 June, 2019, 6:00
उन दिनों स्वामी विवेकानंद अमरीका के भ्रमण पर थे। एक दिन वे भ्रमण एवं भाषणों से थके हुए अपने निवास स्थान पर लौटे। वे अमेरिका में एक महिला के अतिथि थे। वे अपना भोजन स्वयं बनाते थे। वे भोजन बनाकर खाने की तैयारी में थे कि कुछ बच्चे पास आकर... आगे पढ़े

आचार-विचार वाली मूर्खता 

Updated on 22 June, 2019, 6:00
एक बार एक अजनबी किसी के घर गया पर वह खाली हाथ आया ही था तो उसने सोचा कि कुछ उपहार देना अच्छा रहेगा तो उसने वहां के मेहमान कक्ष में टंगी एक पेंटिंग उतारी और जब घर का मालिक आया तो उसे वही पेंटिंग देते हुए कहा, 'यह पेंटिंग... आगे पढ़े

गलती का एहसास 

Updated on 21 June, 2019, 6:15
एक समय की बात है एक शहर के बुद्धिमान व्यक्ति के पास एक शख्स आया और उसने उनसे जानना चाहा कि उनके पास लोग तो बहुत हैं जो उसके कहने पर काम करते हैं, लेकिन उसके पास कोई भी विश्वासपात्र व्यक्ति नहीं है। उसने कहा कि 'मेरे कर्मचारी मुझसे बात... आगे पढ़े

अत्याचार का विरोध  

Updated on 20 June, 2019, 6:00
एक बार की बात है स्वामी विवेकानंद रेल में यात्रा कर रहे थे। वो जिस डिब्बे में बैठे थे, उसी में एक महिला भी अपने बच्चे के साथ यात्रा कर रही थी। एक स्टेशन पर जब ट्रेन रुकी तो दो अंग्रेज अफसर उस डिब्बे में चढ़े और महिला के सामने... आगे पढ़े

आनंद की वर्षा  

Updated on 19 June, 2019, 6:00
एक बार की बात है प्रभु यीशु एक झील के किनारे उपदेश दे रहे थे। वहां उपस्थित लोगों को वो बता रहे थे कि 'एक बार एक किसान ढेर सारे बीज लेकर अपने खेत में बोने ले जा रहा था। उसी समय रास्ते में उससे कुछ बीज गिर गए। उनमे... आगे पढ़े

आशा का दीप बनों 

Updated on 17 June, 2019, 16:15
एक समय की बात है एक महल के बड़े से कमरे में चार दीपक जल रहे थे। इसी के साथ कमरे के परिवेश में शान्ति छाई हुई थी। शान्ति भी ऐसी कि मंद स्वर में की जाने वाली बात-चीत को भी आसानी से सुना जा सकता था। कमरे में जल... आगे पढ़े

खुश होने का दिखावा करने में ज्यादा खर्च होती है जीवन की ऊर्जा

Updated on 17 June, 2019, 6:45
आज की दौड़भाग भरी जिंदगी में कई लोग अंदर से दुखी हैं लेकिन बाहर से खुद को खुश दिखाने की कोशिश करते हैं। ये ही लोग दिखावा करने के अलावा खुद को जबरदस्ती खुश रखने की भी कोशिश करते हैं, लेकिन सदगुरू जग्गी वासुदेव के अनुसार इस तरह से बनावटी... आगे पढ़े

बातचीतः परिवर्तनशील जगत में राम और रावण का युग आता-जाता रहता है- आबिद सुरती

Updated on 6 May, 2019, 14:29
'मासूम को गोरैया से न प्रेम था न ईर्ष्या थी. गोरैया खिड़की पर आ बैठे या छत में घोसला बनाए इसमें उसे क्या आपत्ति हो सकती है? फिर भी वह विचलित हो गई. गोरैया ने अपना घोंसला कहीं और नहीं उसके हृदय में बनाया था... यह उनके उपन्यास 'आधी स्त्री'... आगे पढ़े

स्त्री, युद्ध और ओशो : पढ़ें क्रांतिकारी विचार

Updated on 28 February, 2019, 6:45
स्त्री को अपनी मुक्ति के लिए अपने व्यक्तित्व को खड़ा करने की दिशा में सोचना चाहिए। प्रयोग करने चाहिए। लेकिन ज्यादा से ज्यादा वह क्लब बना लेती है, जहां ताश खेल लेती है, कपड़ों की बात कर लेती है, फिल्मों की बात कर लेती है, चाय-कॉफी पी लेती है, पिकनिक... आगे पढ़े

ध्यान का आधार

Updated on 21 December, 2018, 6:45
ध्यान में कुछ अनिवार्य तत्व हैं, विधि कोई भी हो, वे अनिवार्य तत्व हर विधि के लिए आवश्यक हैं। पहली है- एक विश्रामपूर्ण अवस्था, मन के साथ कोई संघर्ष नहीं, मन पर कोई नियंत्रण नहीं; कोई एकाग्रता नहीं। दूसरा, जो भी चल रहा है उसे बिना किसी हस्तक्षेप के, बस... आगे पढ़े

ध्यान का आधार

Updated on 16 December, 2018, 6:15
ध्यान में कुछ अनिवार्य तत्व हैं, विधि कोई भी हो, वे अनिवार्य तत्व हर विधि के लिए आवश्यक हैं। पहली है- एक विश्रामपूर्ण अवस्था, मन के साथ कोई संघर्ष नहीं, मन पर कोई नियंत्रण नहीं; कोई एकाग्रता नहीं। दूसरा, जो भी चल रहा है उसे बिना किसी हस्तक्षेप के, बस... आगे पढ़े

केवल इस तरह आप ईश्वर को कर सकते हैं प्राप्त, करें नियम पाल

Updated on 7 December, 2018, 7:00
जीवन में दिनचर्या की सहजता का बहुत महत्व है। सहजता से तात्पर्य है हमारे जीवन में आकार ले रही समस्त घटनाओं, क्रियाओं और स्थितियों-परिस्थितियों को सहज भाव-बोध के साथ स्वीकार करना और उसके अनुरूप अपने मानवीय कर्तव्यों का निर्वहन करना। जब हमें आत्मिक अवस्था में स्थिर रहते हुए यह ज्ञात... आगे पढ़े